सुकमा। सरकार की नई आत्मसमर्पण पुनर्वास नीति और इलवद पंचायत योजना के तहत इस गांव के विकास के लिए एक करोड़ रुपए दिए जाएंगे। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले का बड़ेसट्टी गांव नक्सलवाद से मुक्त होने वाला पहला गांव बन गया है। सरकार की नई आत्मसमर्पण पुनर्वास नीति और इलवद पंचायत योजना के तहत इस गांव के विकास के लिए एक करोड़ रुपये दिए जाएंगे। नक्सलमुक्त होने पर गृहमंत्री अमित शाह ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।
गृहमंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया एप एक्स पर लिखा- ‘छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में विभिन्न आॅपरेशन्स में कोबरा कमांडो और छत्तीसगढ़ पुलिस ने 22 कुख्यात नक्सलियों को आधुनिक हथियारों और विस्फोटक सामग्रियों के साथ गिरफ्तार किया है। साथ ही, सुकमा की बडेसेट्टी पंचायत में 11 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिससे यह पंचायत पूरी तरह नक्सलमुक्त हो गई है। छिपे हुए नक्सलियों से मेरी अपील है कि मोदी सरकार की आत्मसमर्पण नीति को अपनाकर यथाशीघ्र हथियार डालें और मुख्यधारा में शामिल हों। 31 मार्च 2026 से पहले हम देश को नक्सलवाद के दंश से मुक्त करने के लिए संकल्पित हैं।’
2021 में स्थापित हुआ था कैंप:
्रगौरतलब है कि सुकमा जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर बड़ेसेट्टी में शुक्रवार को 11 नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद गांव नक्सलमुक्त हो गया। बड़ेसट्टी के सरपंच कलमू जोगा (33) ने बताया कि पुलिस की मदद से स्थानीय पंचायत ने हमारे इलाके में प्रतिबंधित संगठन से जुड़े लोगों को हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया। नक्सलवाद के लिए बदनाम रहे बड़ेसट्टी ने 2021 में शांति की ओर पहला कदम तब उठाया, जब वहां छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (सीएएफ) का कैंप स्थापित किया गया।
बड़ेसट्टी में तैनात सीएएफ की पहली बटालियन के कंपनी कमांडर जमुना कुमार रजक ने बताया कि कैंप स्थापित होने के बाद इलाके में एक सड़क का निर्माण हुआ और विकास होने लगा। जल्द ही नक्सली गतिविधियां कम होने लगीं। पंचायत के आठ बस्तियों में से छह में बिजली की आपूर्ति है।
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