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  • नक्सली को हुआ एकतरफा प्यार, सरेंडर के बाद बताया लव स्टोरी

    10-Jul-2025

     जगरगुंडा इलाके का रहने वाला है। इसकी पत्नी अरुणा लेकाम बीजापुर जिले के एक गांव की रहने वाली है। आगे अमित ने कहा कि, सरेंडर तो कर दिया हूं। अब परिवार बढ़ाने के लिए, बच्चे के लिए मैं अपनी नसबंदी खुलवाऊंगा। मैं DRG में नहीं जाना चाहता। बस पत्नी के साथ गांव में रहकर खेती-किसानी करना चाहता हूं। खुशहाल जीवन चाहता हूं। अमित ने बताया कि वो और उसकी पत्नी किसी भी मुठभेड़ में शामिल नहीं रहे हैं।  अमित नक्सल संगठन में DVCM कैडर का था। इस पर 8 लाख रुपए का इनाम घोषित था। जबकि इसकी पत्नी ACM कैडर की थी। ये 5 लाख रुपए की इनामी नक्सली थी। अमित कहता है- मेरी मां अकेली है। पिता, भाई, बहन कोई नहीं हैं। जब 12-13 साल का था तो ACM लिंगे नक्सल संगठन में भर्ती करने मुझे ले गई। वहीं हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी। जिसके बाद पहले बस्तर के अलग लोकेशन में मुझे भेजा गया। फिर अबूझमाड़ और महाराष्ट्र के गढ़चिरौली भेजा। मेरा प्रमोशन किया गया और नक्सली लीडर वेणुगोपाल के सुरक्षा गार्ड में शामिल किया गया। ज्यादातर अबूझमाड़ और गढ़चिरौली बॉर्डर पर ही थे। इसी बीच साल 2019 से पहले गढ़चिरौली में एक पार्टी मीटिंग के दौरान अरुणा से मुलाकात हुई। अमित ने बताया कि, पहली नजर में ही वो मुझे पसंद आ गई। वो नक्सल संगठन की मीटिंग के दौरान खाने का बंदोबस्त करना, गांव-गांव से सामान लाने का काम करती थी। मैं किसी न किसी तरह से उससे बात करने की कोशिश करता था। वहीं जब भी उस तरफ जाना होता था तो अरुणा से जरूर मिलता था। हालांकि, तब तक उसे नहीं पता था कि मेरे मन में उसके लिए फीलिंग्स है। वहीं एक दिन बहुत हिम्मत जुटाया और उसे प्रपोज कर दिया। वो हैरान रह गई। कुछ दिनों तक बात भी नहीं की।लेकिन दो महीने के बाद उसने रिश्ता कबूल कर लिया। यदि पति-पत्नी दोनों नक्सली हैं तो नक्सल संगठन में पैरेंट्स बनने की इजाजत नहीं है। साल 2019 में मेरी नसबंदी करवाई गई। फिर दोनों ने शादी कर ली। हालांकि, दोनों पैरेंट्स बनना चाहते थे।

     

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