संगठन योद्धा, लोकतंत्र सेनानी व समर्पण के जीवंत उदाहरण थे जगदेवराम उरांव
रायपुर : अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदेव राम उराँव का गत 15 जुलाई को जशपुर आश्रम में निधन हो गया | वनवासी विकास समिति छत्तीसगढ़ प्रांत की ओर से रोहिणीपुरम स्थित प्रांत कार्यालय में नागरिकों और कार्यकर्ताओं की ओर से श्रद्धा-सुमन अर्पित करने हेतु श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया | श्रद्धांजलि की कड़ी में सर्वप्रथम अपने संस्मरण सुनाते हुए वनवासी कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय प्रशिक्षण प्रमुख निशिकान्त जोशी ने जगदेवरामजी का जीवन परिचय देते हुए बताया कि उनका जन्म जशपुर से 3 किलोमीटर दूर कोमाड़ो नामक गाँव में हुआ था। 12 वर्ष की आयु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क में आये । 1968 वनवासी कल्याण आश्रम के चर्चित व्यक्ति होने के कारण आपातकाल के समय उनको गिरफ्तार कर 6 महीने तक मीसा के तहत जेल में बंद कर दिया गया था | १९९५ से माननीय जगदेव जी वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष के दायित्व का निर्वहन कर रहे थे । 25 वर्षों तक अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने जनजाति समाज के सर्वांगीण विकास के लिए शासन से दृष्टिपत्र तैयार करवाकर निरंतर प्रवास कर जनजागरण करते हुए इस चिंतन को गांव-गांव तक पहुंचाने का कार्य किया | राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसे उच्च दायित्व पर रहते हुए भी उनकी सरलता व सादगी सबसे ज्यादा प्रभावित करती थी | उनकी सबसे बड़ी चिंता वनवासी समाज की अस्मिता की रक्षा थी | उनका दृढ़ विश्वास था कि वनवासी समाज हिन्दू समाज का अभिन्न अंग है | उन्होंने हिन्दू समाज के चार वर्णों की जगह वनवासी समाज को मिलाकर पंच वर्ण बताया |उन्होंने समाज को बार-बार सावधान करते हुए बताया था कि वनवासी समाज के आर्थिक, सामाजिक स्वावलम्बन के साथ-साथ भाव जागरण व अस्मिता रक्षण के मूल कार्य के बिना बाकी कार्य निरर्थक हैं |
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संघचालक बिसराराम यादव ने अपने संस्मरण में बताया कि जगदेवरामजी से मेरा आश्रम के स्थापना काल से ही परिचय था | गीता के श्लोक के अनुसार वे मुक्त पुरूष थे | गांव में उनका मिट्टी का अत्यंत साधारण घर आज भी है उनकी अनासक्ति व निरहंकारिता को प्रदर्शित करती हैं | उनके व्यक्तित्व में पर्याप्त धैर्य व सरलता थी किन्तु भाषणों में ओज व उत्साह का समावेश था |उनके व्यक्तित्व का सही मूल्यांकन वास्तव में संगठन का मूल्यांकन है | आज वनवासी समाज स्वयं को हिन्दू कहता है तो यह कल्याण आश्रम और जगदेवरामजी की ही तपस्या का प्रतिफल है |
पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि सादगी, सरलता, विनम्रता के धनी जगदेवरामजी किसी भी समस्या के प्रति स्पष्ट विचार रखते थे | वे जशपुर के छोटे से गांव से निकलकर अपनी मेहनत के बल पर कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण दायित्व पर पहुंचे | वे संगठन योद्धा थे | गर्मजोशी के साथ काम करते हुए आपातकाल के समय लोकतंत्र सेनानी के रूप में जेल गए | बाहर आकर दोगुने उत्साह के साथ फिर से संगठन का कार्य विस्तार किया | उन्होंने जिस तरह पूरे मनोयोग से अपना कार्यकाल बिताया इससे बड़ा समर्पण का उदाहरण दूसरा कोई नहीं हो सकता |
पूर्व शिक्षा मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि जगदेवरामजी के जनजाति समाजोत्थान के कार्य को हम कभी नहीं भूल सकते | उनके नेतृत्व में स्व. राजमाता श्रीमती विजयाराजे सिंधिया के मुख्य आतिथ्य में भानपुरी में वनवासी मेले का आयोजन किया गया था जो काफी सफल व लोकप्रिय रहा |
कार्यक्रम क प्रारंभ मेे शबरी कन्या आश्रम की छात्रा हेमोलिका ने व्यक्तिगत गीत प्रस्तुत किया | अंत में सभी उपस्थित कार्यकर्ताओं, नागरिकों व शबरी कन्या आश्रम की छात्राओं ने व्यक्तिगत दूरी का पालन करते हुए कतारबद्ध होकर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी | इसके पश्चात सामूहिक ओंकार नाद व शांतिपाठ से सभा का समापन हुआ | सभा का संचालन समिति के सचिव हरिनारायण मोहता ने किया | इस अवसर पर संघ के अ. भा. शारीरिक प्रमुख सुनील कुलकर्णी, प्रांत प्रचारक प्रेमशंकर सिदार, प्रांत सह संघचालक डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना, आश्रम के हितरक्षा प्रमुख गिरीश कुबेर, श्रद्धा जागरण प्रमुख रमेश बाबू, व्यवस्था प्रमुख प्रकाश काले, महिला प्रमुख माधवी जोशी, समिति के अध्यक्ष रतनलाल अग्रवाल, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, विधायक बृजमोहन अग्रवाल, संगठन मंत्री पवनदेव साय, संजय श्रीवास्तव सहित अनेक गणमान्य नागरिक व कार्यकर्ता उपस्थित थे |
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