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  • दुर्ग रेंज आईजी रामगोपाल गर्ग ने ली 259 दोषमुक्ति प्रकरणों की समीक्षा बैठक

    03-Sep-2025

    दुर्ग। पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) दुर्ग रेंज रामगोपाल गर्ग (भा.पु.से.) ने मंगलवार को रेंज स्तरीय दोषमुक्ति प्रकरणों की समीक्षा बैठक आयोजित कर पुलिस और अभियोजन अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। इस बैठक में कुल 259 प्रकरणों की गहन समीक्षा की गई, जो तीन घंटे से अधिक समय तक चली। बैठक का मुख्य उद्देश्य उन खामियों और लापरवाहियों पर चर्चा करना रहा, जिनकी वजह से कई मामलों में आरोपी बरी हो जाते हैं। अग्रिम जमानत निरस्तीकरण के बावजूद गिरफ्तारी नहीं, आईजी ने जताई नाराजगी बैठक में आईजी गर्ग ने विशेष रूप से उन मामलों पर नाराजगी जताई, जिनमें माननीय न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत निरस्त करने के बाद भी पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी सुनिश्चित नहीं कर पाई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि अग्रिम जमानत खारिज कर दी जाती है, तो संबंधित पुलिस अधिकारी की जवाबदेही होगी कि वह जल्द से जल्द आरोपी को गिरफ्तार करे। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि ऐसे प्रकरणों का अलग से ब्योरा तैयार किया जाए और जहां गिरफ्तारी नहीं हो सकी है, वहां ठोस कारणों का उल्लेख किया जाए।   विवेचना और अभियोजन में सुधार की जरूरत आईजी गर्ग ने कहा कि कई मामलों में दोषमुक्ति का कारण पुलिस विवेचना और अभियोजन में लापरवाही होता है। ऐसे मामलों में सुधार लाना बेहद जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन अधिकारियों की वजह से विवेचना या अभियोजन में कमी रही है, उनकी जवाबदेही तय की जाएगी और आवश्यकतानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। झूठी शिकायत करने वालों पर भी होगी कार्रवाई बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि झूठी शिकायत करने वाले व्यक्तियों और निर्दोष लोगों को झूठा फंसाने वाले आरोपियों के खिलाफ अभियोजन अधिकारियों द्वारा न्यायालय में प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाए। आईजी ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि गलत तरीके से मुकदमे दर्ज कराने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। इससे भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी।   वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी इस समीक्षा बैठक में दुर्ग रेंज के सभी वरिष्ठ अधिकारी और अभियोजन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी उपस्थित रहे। इसमें संयुक्त संचालक अभियोजन दुर्ग एस.एस. ध्रुव, उप निदेशक अभियोजन दुर्ग श्रीमती अनुरेखा सिंह, सहायक जिला अभियोजन बालोद प्रमोद घृतलहरे, उप निदेशक अभियोजन बेमेतरा आशीष कुमार सिन्हा, सहायक जिला अभियोजन बेमेतरा विनय अग्रवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दुर्ग श्रीमती पद्मश्री तंवर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बेमेतरा श्रीमती ज्योति सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बालोद श्रीमती मोनिका ठाकुर, उप पुलिस अधीक्षक श्रीमती शिल्पा साहू, उप निरीक्षक राजकुमार प्रधान एवं पुलिस पीआरओ प्रशांत कुमार शुक्ला शामिल रहे।   प्रकरणों की गहन पड़ताल बैठक में 259 प्रकरणों की अलग-अलग समीक्षा की गई। इसमें उन मामलों पर विशेष चर्चा की गई जहां सबूतों की कमी, गवाहों के मुकरने या विवेचना की त्रुटियों के कारण आरोपी दोषमुक्त हो गए। आईजी ने अधिकारियों को आदेशित किया कि भविष्य में विवेचना की गुणवत्ता में सुधार लाया जाए और हर केस में ठोस सबूत व गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। आईजी गर्ग ने साफ कहा कि पुलिस का काम सिर्फ प्रकरण दर्ज करना और कोर्ट में पेश करना भर नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि अपराधी को सजा मिले। इसके लिए विवेचना से लेकर अभियोजन तक हर स्तर पर पारदर्शिता और गंभीरता बरती जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकरण में लापरवाही साबित होती है तो उस अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी।

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