रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज एक युग का अंत हो गया। अविभाजित मध्यप्रदेश से लेकर वर्तमान छत्तीसगढ़ तक समाज सेवा, गौसेवा और सामाजिक एकता के प्रतीक रहे वरिष्ठ समाजसेवी श्री रामजीलाल अग्रवाल ने 96 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। अपने जीवनकाल में उन्होंने न केवल अग्रवाल समाज बल्कि समूचे प्रदेश में मानवीय मूल्यों, सेवा भाव और सामाजिक समर्पण की ऐसी मिसाल पेश की, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी प्रेरणा के रूप में स्मरण करती रहेंगी।
राजस्थान के टीबा बसाई (झुंझनू) से आकर रायपुर को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले रामजीलाल जी का जीवन संघर्ष, संकल्प और सेवा का परिचायक रहा। सन् 1951 में विवाह उपरांत रायपुर आकर उन्होंने रामसागरपारा में व्यवसायिक जीवन की शुरुआत की और शीघ्र ही समाजसेवा से जुड़ गए। सामाजिक सक्रियता का उनका सफर 1960 के दशक से आरंभ हुआ, जो अंतिम सांस तक जारी रहा। सामाजिक और पारिवारिक जीवन का आदर्श स्वरूप श्री रामजीलाल अग्रवाल एक आदर्श परिवार के मुखिया रहे। वे श्रीमती सावित्री देवी अग्रवाल के पति और सांसद एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल सहित गोपालकृष्ण, विजय, योगेश, यशवंत अग्रवाल के पिता थे। इसके अतिरिक्त वे विष्णु अग्रवाल के बड़े भाई, पूरनलाल, राजेन्द्र प्रसाद, कैलाश, अशोक अग्रवाल के चाचा, और देवेंद्र एवं गणेश अग्रवाल के ताऊजी थे। उनका विशाल परिवार आज भी सामाजिक व व्यावसायिक क्षेत्र में सक्रिय है, जो उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहा है।
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