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21-Sep-2023 1:54:55 pm

राज्यसभा ने कहा- इसरो ने स्वर्णिम अक्षरों से लिखी देश की गौरव गाथा, हर चुनौती को हल करने में समर्थ भारत

राज्यसभा ने कहा- इसरो ने स्वर्णिम अक्षरों से लिखी देश की गौरव गाथा, हर चुनौती को हल करने में समर्थ भारत

नई दिल्ली 21 सितम्बर 2023। राज्यसभा ने चंद्रयान-3 अभियान की सफलता के लिए भारतीय वैज्ञानिकों खासकर महिलाओं को बधाई देने का प्रस्ताव बुधवार को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। ‘भारत की गौरवशाली अंतरिक्ष यात्रा चंद्रयान-3’ की सफल सॉफ्ट लैंडिंग विषय पर उच्च सदन में सात घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा के नेता पीयूष गोयल ने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अंतरिक्ष की अनंत ऊंचाइयों में भारत की गौरव गाथा को स्वर्णिम अक्षरों से लिखा है। चंद्रयान-3 और आदित्य एल1 की सफलता साबित करती है कि देश बड़ी-बड़ी चुनौतियों का सामना करने और उनका समाधान देने में सक्षम है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, चंद्रयान-3 की सफलता का भारत के औद्योगिक व तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र पर बड़ा असर पड़ेगा।

 
वहीं, विपक्षी सांसदों ने वैज्ञानिकों के वेतन में वृद्धि की मांग करते हुए अनुसंधान पर कम खर्च को लेकर सरकार की आलोचना की। माकपा के वी सिवादासन ने कहा, सरकारी फंडिंग की कमी के कारण कुछ वर्षों में अंतरिक्ष मिशन लॉन्च की संख्या में कमी आई है। विज्ञान व प्रौद्योगिकी पर भारत का खर्च मात्र 0.7% है, जबकि दक्षिण कोरिया, अमेरिका और चीन जैसे देश कहीं अधिक खर्च करते हैं। निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल ने कहा आप चांद तक पहुंच सकते हैं, लेकिन आपको जमीन पर लोगों की देखभाल करने की जरूरत है।
 
एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर 1960 के दशक के बाद से अंतरिक्ष क्षेत्र में हासिल मील के पत्थर को मिटाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। रमेश ने कहा, भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम को विकास के एक साधन के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि सशक्त राष्ट्रवाद के एक साधन के रूप में।
 
कांग्रेस के कारण लगे 75 साल
केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस पर निशाना साधा। कहा, आपने अंतरिक्ष विभाग को गोपनीयता के पर्दे के पीछे रखा था। आम आदमी एवं मीडिया को श्रीहरिकोटा में झांकने की भी अनुमति नहीं थी। कांग्रेस ने उद्योगों को शामिल होने की अनुमति नहीं दी। इससे प्रगति रुक गई और हमें 75 वर्ष लग गए, जहां हम अब पहुंच पाए हैं।

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